शुक्रवार, 7 मई 2010

"रक्त सम्बन्ध''

मै डेढ़ बजे तक आपके पास पहुँच जाऊंगा, चिंता मत करो। इश्वर सब ठीक करेंगे। मोबाइल कान से हटाते ही अशोक ने हिसाब लगाया। 'अनुपम बस स्टॉप' तक दस मिनट , बस में एक घंटा और आगे पंद्रह मिनट। कुल मिलकर डेढ़ घंटा। अभी साधे ग्यारह बजे हैं। आधे घंटे में चार लोगों का खाना बनाने के लिए पत्नी से कहकर वह चारपाई पर लेट गया।


"किसका फ़ोन था? पत्नी ने आटा गूंथते हुए उत्सुकता प्रकट की।


" मेरे बचपन के साथी तरुण का। उसकी माताजी बीमार हैं और अस्पताल में भर्ती हैं। तरुण को गत दिनों पीलिया हुआ था और उसकी बहन में डाक्टरों ने खून की कमी बताई है। इसलिए वे दोनों रक्तदान नहीं कर सके। खून की तुरंत आवश्यकता है। "


" आपने अभी कुछ दिनों पहले ही रक्तदान किया है। दो दिन से हल्का ज्वर भी है। मै नहीं कहती थी की दवाई ले लो? कोई परेशानी तो नहीं होगी? पत्नी के प्रश्न में प्रेमासक्ति थी।


" उन्होंने बड़ी आशा से मेरे पास फ़ोन किया है। गाव से दूर इस शहर में उनका कौन अपना है। ऐसी छोटी मोटी व्याधियों को मै इस फर्ज में बाधा नहीं बनने दे सकता। "


अस्पताल की रक्त बैंक प्रभारी रविवार के दिन डेढ़ बजे रक्तदाता के आगमन से बिलकुल खुश नहीं थी। " ऐसे 'हेल्दी डोनर' को सुबह से नहीं बुला सकते थे? हमारे ड्यूटी ओवर ख़त्म होने को हैं। हमें भी घर जवाब देना पड़ता है। " अपनी अप्रसन्नता प्रकट करते हुए उसने 'डोनर' को टेबल पर लेटने का इशारा किया।


" भाई अशोक मै तुम्हारा एहसान मंद हूँ. आज तक हम मित्र थे, आज से रक्त सम्बन्धी भी हुए. " रक्तदान के बाद तरुण भावुक होकर कह रहा था.


" हे इश्वर! मेरी ऐसी शारीरिक और मानसिक अवस्था बनाये रखना की मै सदैव किसी के काम आ सकूँ. आज जब एक बेटा और बेटी चाहते हुए भी अपनी माँ के लिए रक्तदान नहीं कर सके, वहां मै यह भूमिका निभा पाया, यह सब आपकी ही कृपा है " अस्पताल से लौटकर अशोक अपने इष्ट देव के सम्मुख नतमस्तक था.

2 टिप्‍पणियां:

  1. This is not episode, He did in real life ....
    I have wish for you... You will get lot of happiness from this life..... and get unexpected gift from life...

    Thanks for sharing this movement of your life…
    Thanks & Regards
    ===============
    Yogesh Dhiman

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