मंगलवार, 1 जून 2010

आदमी भला सा लगता है.

जिसके चारों तरफ एक जलजला सा लगता है/
वक़्त बुरा है मगर आदमी भला सा लगता है/

हँसते हँसते उड़ा देता है दुनिया भर के गम,
देखने में यूँ बड़ा वह मनचला सा लगता है/

जिन्दगी किस मोड़ पर क्या रंग बदले कौन कहे,
पत्थर भी कभी कभी गुड का डला सा लगता है/

गम से घिरा है फिर भी कमल के जैसा है,
इसका बचपन दुश्वारियों में पला सा लगता है/

वह अमीरे शहर तो बस अपने साथ जीता है,
खुशनसीब है जो सबसे मिला-जुला सा लगता है/

पवन धीमान
+50938050683

15 टिप्‍पणियां:

  1. हँसते हँसते उड़ा देता है दुनिया भर के गम,
    देखने में यूँ बड़ा वह मनचला सा लगता है।

    बेहतरीन पवन जी

    आभार

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  2. हँसते हँसते उड़ा देता है दुनिया भर के गम,
    देखने में यूँ बड़ा वह मनचला सा लगता है/
    Bahut Khoob kha...
    Jo hansee main gum ko udana seekh geya....
    usne hee asal zindagee ko paya hai.....

    जिन्दगी किस मोड़ पर क्या रंग बदले कौन कहे,
    पत्थर भी कभी कभी गुड का डला सा लगता है/

    Aur kon jane zindagee aap ko kon-kon se din dekhaye....
    so har pal muskrana seekh loo......

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  3. जिसके चारों तरफ एक जलजला सा लगता है/
    वक़्त बुरा है मगर आदमी भला सा लगता है

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  4. पत्थर भी गुड का डला सा लगता है....वाह....बहुत सुन्दर...बढ़िया ग़ज़ल है .

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  5. Pawan Ji,
    Namaste,
    जिसके चारों तरफ एक जलजला सा लगता है/
    वक़्त बुरा है मगर आदमी भला सा लगता है
    Bahut sunder vicharon vali pyari Rachna. Badhaai.
    Surinder Ratti

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  6. ब्लाग जगत में आपका स्वागत है पवन भाई !

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  7. हँसते हँसते उड़ा देता है दुनिया भर के गम,
    देखने में यूँ बड़ा वह मनचला सा लगता है ..

    पवन भाई .. लाजवाब शेर है ये ... आपकी ग़ज़ल बहुत ही कमाल की लगी ...

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  8. वाह! कमाल!’सच में’ कमाल.

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  9. बहुत अच्छी लगी आपकी यह ग़ज़ल!
    आपसे परिचय करवाने के लिए संगीता स्वरूप जी का आभार!
    --
    आँखों में उदासी क्यों है?
    हम भी उड़ते
    हँसी का टुकड़ा पाने को!

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