बुधवार, 16 जून 2010

आकांक्षाए और जीवन

आदमी के लिए
जरुरी है;
खाने को दाल रोटी,
पहनने को कपडा,
रहने को मकान
और
जीने  के लिए प्रेम,
पर
कष्टमय  है
जीवन
क्योंकि
प्रेम विहीन  है
और भी
सब कुछ पाने की
लालसा में
और जानने को  
यह  सच
अपने अनुभव से /

7 टिप्‍पणियां:

  1. सच है पवन जी सीमित आवश्यकताओं के बावजूद आकांक्षाएं व अतृप्ति का भाव व्यक्ति को संन्तुष्ट नही रहने देता...सुन्दर, सशक्त व सार्थक रचना हेतु बधाई।

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  2. कम शब्द और गहरी बात। सुन्दर।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  3. सुन्दर, सशक्त व सार्थक रचना हेतु बधाई।

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  4. Man agar asantusht hai to kabhi bhi jeevn sukhi nahi rah sakta ... achha likha hai ...

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