गुरुवार, 10 जून 2010

बचपन... माँ की गोद में

खट्टी मीठी जिंदगी के
टेढ़े मेढ़े रास्तों पर,
मीठे मीठे सपनो की
बात ही न्यारी है/
जिंदगी के साथ साथ
जनम लेते हैं सपने,
सपनो के साथ चलती
जिंदगी हमारी है/

जीवन का पहला साल,
सपनो से मालामाल,
माँ की गोद मीठी
मीठी लोरिया सुनाती है/
बच्चे के साथ,
बच्चा बन जाती है माँ,
हंसती है, गाती है,
कभी तुतलाती है /
दुसरे बरस में
धुल देती है न्यौता ,
खेलने को अपने
पास बुलाती है/
तीसरे बरस में
चोटी गुंथती है माँ,
माथे पर काजल का
टीका लगाती है/
हंसा नहीं रोया नहीं,
खाया नहीं,सोया नहीं,
क्या क्या कहके
माँ ने नजर उतारी है/
खट्टी मीठी जिंदगी के
टेढ़े मेढ़े रास्तों पर
मीठे मीठे सपनो की
बात ही न्यारी है.....

                                        ......जारी

7 टिप्‍पणियां:

  1. दुनिया में माँ को भुला पाना मुश्किल है ...बहुत बढ़िया रचना आभार

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  2. मीठे मीठे सपनो की
    बात ही न्यारी है.....


    -सच कहा...माँ की बदौलत ही यह सपने भी हैं.

    सुन्दर रचना.

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  3. खट्टी मीठी जिंदगी के
    टेढ़े मेढ़े रास्तों पर
    मीठे मीठे सपनो की
    बात ही न्यारी है.....
    बहुत सुन्दर रचना है बचपन की याद दिला दी। शुभकामनाये

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  4. बहुत सुन्दर और बहुत गहरी कविता है ये. आपके काव्यकोश का एक और अनमोल मोती.

    सादर प्रणाम.

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