शुक्रवार, 11 जून 2010

जीवन... यौवन की दहलीज पर

                                            (३).... पिछली पोस्ट से लगातार
खट्टी मीठी जिंदगी के
टेढ़े मेढ़े रास्तों पर,
मीठे मीठे सपनो की
बात ही न्यारी है/
जिंदगी के साथ साथ
जनम लेते हैं सपने,
सपनो के साथ चलती
जिंदगी हमारी है/


आया सौलहवा बसंत,
लाया सपने अनंत,
सपने जैसे
सतरंगी हो जाते है/
कोयल की कूक  
आमंत्रण लगती है  ,
फूल इशारे देकर
भँवरे को बुलाते है/
तन मन में मदहोशी
सी छा जाती है ,
सपनो में हँसते हैं,
सपनो में गाते हैं/
सपनो में चाँद तारे
तोड़ लाते हैं कभी,
कभी चाँद को
अपने पहलु में सुलाते हैं/
घोड़े पर सवार होकर
जाते हैं  सपनो के देश ,
सपनो में आती 
एक राजकुमारी  है/
खट्टी मीठी जिंदगी के
टेढ़े मेढ़े रास्तों पर,
मीठे मीठे सपनो की
बात ही न्यारी है/.....








5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......

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  2. ..नया अंदाज है कहने का..बहुत खूब.

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  3. सपनो के ताने-बाने पर जीवन बुनती सुन्दर व सार्थक कविता..बधाई।

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