पिछली पोस्ट से लगातार (५)
खट्टी मीठी जिंदगी के
टेढ़े मेढ़े रास्तों पर,
बात ही न्यारी है/
जिंदगी के साथ साथ
जनम लेते हैं सपने,
सपनो से हम भागें,
जिंदगी ही सपने
की तरह गुजर गयी /
बोझ सी लगने लगी
अपनी ही काया जैसे,
जीने की चाह भी
मन से उतर गई/सब इंतज़ार में हैं,
अब टूटी, तब फूटी,
काया की गागर
लबालब भर गई/
आंखे खुली रह गई
सपनो में खोई सी,
सपने मरे नहीं
लो काया मर गई/
दो दिल फिर मिलेंगे,
फिर होगा एक जनम
सपनो का सफ़र
रुका नहीं जारी है....
खट्टी मीठी जिंदगी के
टेढ़े मेढ़े रास्तों पर,
मीठे मीठे सपनो की
बात ही न्यारी है/